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Posts tagged ‘प्रत्याहार’

PRATYAHARA: USE THE WORLD LIKE A MIRROR

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Pratyahara is not to block your senses. It is not correcting the creation of God by blinding the eyes etc. Pratyahara is awakening to the experience of senses. It is not to abandon joy and happiness. It is about enjoying the world while being awake. You simply have not to carry the debris of your sense experience.

इन्द्रियों को इस दुनिया से विमुख नहीं करना है। आपकी इन्द्रियाँ मूल्यवान हैं स्वयँ ईश्वर ने इन्हें आपको सौंपा है। इन्हें बंद कर देने से ईश्वर का अपमान होगा। ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है। केवल इन इन्द्रियों को जाग कर इस्तेमाल करना है। इनसे दुनिया की खबर सूचनाएँ हासिल करनी हैं और बस। इतना ही करना है। उन सूचनाओं के कूड़ा करकट को भीतर जमा नहीं होने देना है। इतना काफी है यह प्रत्याहार हो जाता है। जब वस्तुएँ सामने हों तो उन्हें देखने, सूँघने, चखने, सुनने और छूने में क्या आपत्ति हो सकती है। उनका उपयोग करो और आगे बढ़ो। रुकना नहीं है।

 

 

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PRANAYAMA IS THE DIMENSION OF YOUR BREATH

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By controlling your breath you can control your body and your mind. Pranayam is a remedy to overcome anxiety, depression, self-guilt, sadness and unknown fear. The Pranayam is the only technique available to approach and then control your mind without adopting any invasive methods.

बात सिर्फ मूर्ति जैसा होकर बैठने की नहीं है। आगे की है। सुखपर्वक स्थिर होने की है। सुख जब शरीर बेचैन ना हो, सुख जब दूसरों के धन के सपने ना आएँ, सुख जब चित्त शाँत हो जाए। उन्होंने सुख का अर्थ सोना भी नहीं लिया वरना तो सोने से बेहतर कोई और स्थिति ना होती जब आप स्थिर भी होते और सुखी भी होते। परन्तु योग सोने का ठिकाना नहीं है जागने का उपाय है।

पुराने ऋषि शरीर को गिरा देने के लिए गुफाओं और जंगलों में चले जाते थे। भूख प्यास की चरम स्थितियों के बाद शरीर गिर जाता था। चेतना के ऊपर पड़ा परदा झीना हो जाता था। यह चेतना को जगाने का उपाय था। आज भी कई सम्प्रदायों के लोग मृत्यु से पूर्व अन्न और जल को त्याग कर शरीर की बाहरी ऊर्जा को गिरा देते हैं। वे अपनी चेतना को उच्चतम विकास तक ले जाने का उपाय करते हैं। जो बिल्कुल भौतिक आधार पर जीते हैं उनके लिए इसे समझना काफी मुश्किल है। इसीलिए योग आसन में उतरने से पहले यम और नियम के द्वारा साधक को पर्याप्त होमवर्क करवा देता है।

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ASANA: Feel a Motion inside your Stationary Body

Yoga sitting

Asana is a pleasant stability of your body. Then you can realize a changing inner self inside that stationery body. Asana is a device for realization that you exist even beyond the limits of your body. It shows you the path of moving ahead in consonance with that inner consciousness.

It is different from what is being sold in the market in the name of Asana.

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NIYAMA IN YOGA

Woman balancing on beach front wall

Woman balancing on beach front wall

निज् + यम = नियम. YAMAS meant for you individually are NIYAMAS. These are meant to rinse your inner existence. Yoga starts with some psychological tools to mould your consciousness. NIYAMAS are those psychological tool directed to prepare you for next stage of ASANAS. Here are the details .

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YAMA THE REGULATOR REGULATES YOUR TRAINING IN YOGA

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Yama is the regulator. यम का अर्थ है नियंत्रक। जैसे मृत्यु के देवता यम नवजीवन के लिए संभावना तैयार करते हैं योग में भी यम आपकी जड़ता और Inertia को तोड़कर आपके लिए नई संभावनाओं की भूमि तैयार करता है।

यम है व्यवस्था करना, अतिरेक से रोकना, अति से रोकना, not to allow excesses, not to allow doing excess, not to allow bearing excesses

अति करना आदमी का स्वभाव है। उसकी बनावट में ही अति, excess करना छिपा हुआ है। जब वह आस्तिक बनेगा तो ढेरों पूजा करेगा, सब तीर्थ करेगा, उपवास करेगा और जब नास्तिक बनेगा तो भगवान को खत्म करने के तर्क देगा, विज्ञान की दुहाई देगा और आखिर में गाली भी देगा। आप अतियों पर रहते हो। छोरों पर रहते हो। you have extremes of values in your life. Extreme of honesty, extreme of truth, extreme of love extreme of hatred. Everything is there in extreme.

Because balance is difficult. Balance needs an effort. A positive effort on your part. Yama is that effort that inculcates balance between you and your surroundings.

मृत्यु के देवता को यम इसीलिये कहते हैं कि वह जीवन के अतिरेक को रोकते हैं। जीवन इतना ललचाने वाला है कि यदि यम का हस्तक्षेप ना हो, यम मृत्यु का आयोजन ना करें तो कोई भी यहाँ इस धरती से जाना ना चाहेगा। सब यहीं जमा होते रहेंगे और जीवन में नएपन के आने का कोई रास्ता ना बचेगा। यम मृत्यु के द्वारा जीवन में नयापन लाते हैं। जो पुराना है और जो अपना जीवन जी चुका है उसे अब जाना होगा और जो नया है जो अधिक अनुकूल है उसे आना होगा। जीवन में नये मूल्यों को मृत्यु के देवता यम लाते हैं।

योग आपको इस जीवन से जोड़ने का आयोजन है तो यह पुरानेपन की राख पर खड़ा ना हो पाएगा। पुराने का झाड़ देना होगा। जीवन में नये तार बजना चाहते हैं। पुराने साज पर यह मुमकिन नहीं होगा। योग की टूल किट में यम और नियम इसी नए साज को बजाने के दो तरीके हैं।

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Yoga Unfolds New Horizons of Life for You

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Yoga enables you to transcend your sorrows and fills you with an energy of liveliness. Yoga is not merely bending your bodies and keep doing that daily morning. It is much beyond that. This Video shows the potential. Watch this video on youtube

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